Friday, 28 February 2025

दाल मखनी रेसिपी | Dal Makhani Recipes

 दाल मखनी रेसिपी | Dal Makhani Recipes

क्या आपने कभी रेस्टोरेंट में दाल मखनी खाकर सोचा है कि काश ऐसा स्वाद घर पर भी मिल जाए? वह क्रीमी टेक्सचर, मक्खन की खुशबू और मसालों का गजब का मेल- सिर्फ सोचकर ही मुंह में पानी आ जाता है!

मगर अब आपको बाहर जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसी शानदार रेसिपी जिससे आप घर बैठे ही रेस्टोरेंट जैसी लाजवाब दाल मखनी (Restaurant Style Dal Makhani) बना सकते हैं। 

तो चलिए, बिना देर किए जानते हैं इस लजीज डिश को बनाने का आसान तरीका। 

दाल मखनी बनाने के लिए सामग्री:

 1 कप साबुत उड़द दाल
1/4 कप राजमा
4-5 कप पानी (दाल और राजमा उबालने के लिए)
2 बड़े चम्मच मक्खन
1 बड़ा चम्मच घी
1 छोटा चम्मच जीरा
1 प्याज (बारीक कटी हुई)
1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
2 बड़े चम्मच टमाटर प्यूरी
1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1 छोटा चम्मच गरम मसाला
1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
1/2 कप फ्रेश क्रीम
नमक स्वादानुसार
ताजा धनिया पत्ता (गार्निश के लिए)

दाल मखनी बनाने की विधि:

 सबसे पहले उड़द दाल और राजमा को एक बर्तन में लें और अच्छे से धो लें। फिर इसे रातभर (8-10 घंटे) के लिए पानी में भिगो दें। इससे दाल और राजमा अच्छे से फूल जाएंगे और जल्दी पकेंगे।
अब प्रेशर कुकर में 4-5 कप पानी डालें, उसमें भीगी हुई दाल और राजमा डालें। थोड़ा सा नमक और हल्दी डालकर मीडियम आंच पर 6-7 सीटी लगाएं, ताकि दाल अच्छी तरह से गल जाए।
एक कढ़ाई में मक्खन और घी गर्म करें। इसमें जीरा डालें और जब यह चटकने लगे, तो कटी हुई प्याज डालकर भूनें। जब प्याज हल्का सुनहरा हो जाए, तो अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और 2-3 मिनट तक भूनें। अब टमाटर प्यूरी डालकर धीमी आंच पर पकाएं, जब तक मसाला तेल न छोड़ दे।
अब हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और गरम मसाला डालकर अच्छे से मिलाएं। 2-3 मिनट तक पकने दें। फिर इसमें उबली हुई दाल और राजमा डालकर अच्छे से मिलाएं। जरूरत के अनुसार पानी डालें और धीमी आंच पर 20-25 मिनट तक पकने दें।
जब दाल अच्छी तरह से गाढ़ी हो जाए, तो इसमें फ्रेश क्रीम डालें और अच्छे से मिक्स करें। ऊपर से एक चम्मच मक्खन डालें और 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं।
अब आपकी स्वादिष्ट, क्रीमी और रेस्टोरेंट स्टाइल दाल मखनी तैयार है। इसे हरी धनिया पत्तियों से गार्निश करें और गरमा-गरम बटर नान, पराठा या जीरा राइस के साथ परोसें।

स्पेशल टिप्स:

 दाल को जितनी देर तक पकाएंगे, उतना ही इसका स्वाद बढ़ेगा।
अगर आपको धुएं वाला फ्लेवर चाहिए, तो लकड़ी का एक छोटा टुकड़ा जलाकर, दाल के ऊपर रखें और मक्खन डालकर 5 मिनट के लिए ढक्कन बंद कर दें।
क्रीम की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं।

बाजरे के आटे का चीला | Mileats Chila Receipes

 हेल्दी डाइट की तलाश कर रहे लोग इन दिनों बाजरा काफी पसंद कर रहे हैं। पिछले कुछ समय में यह एक सुपरफूड बनकर उभरा है। 

यह सिर्फ ऊर्जा और पोषण का सोर्स ही नहीं है, बल्कि शरीर में विटामिन बी12 की कमी को दूर करने का भी बेहतरीन जरिया है।

बाजरे का चीला ट्राई करें 

ऐसे में बाजरे की रोटी के अलावा आप इसका चीला भी ट्राई कर सकते हैं, जो स्वाद और पोषण दोनों में बेहतरीन है। इसे डाइट में शामिल करने से शरीर में विटामिन बी12 की कमी भी दूर की जा सकती है। साथ ही शरीर को अन्य कई फायदे भी मिलते हैं। बाजरे का चीला एक स्वादिष्ट, आसानी से बनने वाले और पोषण से भरपूर विकल्प है।

यह न सिर्फ विटामिन बी12 की कमी को पूरा करता है, बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर आप अपने शरीर को पोषण और ऊर्जा तो देते ही हैं, साथ ही रोज की भागदौड़ के बीच अपने लिए एक हेल्दी और जल्दी बनने वाला ऑप्शन भी तलाश कर सकते हैं। 

आइए जानते हैं बाजरे का चीला बनाने की आसान रेसिपी और इसके कुछ बेमिसाल फायदे- 

बाजरे के चीले की रेसिपी:

बाजरे के चीले की  सामग्री:

1 कप बाजरे का आटा
½ कप फर्मेंटेड दही
बारीक कटी सब्जियां (गाजर, प्याज, टमाटर)
अदरक-लहसुन पेस्ट
हरी मिर्च
नमक और मसाले

बाजरे के चीले  बनाने का तरीका

सबसे पहले बाजरे का आटा और दही को मिलाकर गाढ़ा घोल बनाएं।
अब इस घोल में सभी सब्जियां और मसाले डालें और फिर अच्छे से मिलाएं।
इसके बाद तवा गर्म करें और फिर इसे तेल से ग्रीस करें।
अब गर्म तवे पर एक चम्मच घोल डालें और इससे चीला बनाएं।
इसे दही या हरी चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

बाजरे के चीले के फायदे:

 विटामिन बी12 की पूर्ति- बाजरे से बने चीले को नियमित रूप से खाने से शरीर में विटामिन बी12 की कमी दूर होती है।
पाचन में सुधार- फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पेट साफ रखता है।
वजन घटाने में मददगार- यह लो-कैलोरी और हाई-न्यूट्रिशन ऑप्शन है, जो वेट लॉस में मदद करता है।
हड्डियों को मजबूत बनाए- बाजरे में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
एनर्जी लेवल बढ़ाता है- इसमें मौजूद विटामिन बी12 शरीर को एनर्जी से भरपूर रखता है।
इम्युनिटी बूस्ट करे- पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।

 

बैंगन रेस‍िपी बच्‍चों के लिए | Bagan Reciepes for children

 

  बैगन का चोखा रेस‍िपी बच्‍चों  के लिए

 बैगन का चोखा भारतीय रसोई में बनने वाली एक पारंपरिक और स्वादिष्ट डिश है। इसे खासतौर पर उत्तर भारत और बिहार में पसंद किया जाता है। 

बैगन का चोखा बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और इसे आप रोटी, पराठा या चावल के साथ परोस सकते हैं। 

आइए जानते हैं चार लोगों के लिए इसे बनाने की आसान रेसिपी।

बैगन का चोखा कितने लोगों के लिए : 4

बैगन का चोखा सामग्री :

टमाटर- 2
ताजा और बड़ा बैंगन- 2
हरी मिर्च- स्‍वादानुसार बारीक कटी हुई
प्याज- 2 बारीक कटा हुआ
लहसुन- 4-5 कलियां
हरा धनिया- बारीक कटा हुआ
सरसों तेल- 1 tsp
नमक- स्वादानुसार
नींबू का रस- 1 tsp

 बैगन का चोखा विधि :

1. बैंगन का चोखा बनाने के ल‍िए सबसे पहले बैंगन और टमाटर को धो कर भून लें।
2. भुने हुए बैंगन और टमाटर का छिलका उतारकर गूदे को एक बर्तन में निकाल लें।
3. इन्‍हें अच्छे से मैश कर लें।
4. अब कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, लहसुन और हरा धनिया डालें।
5. सरसों का तेल, नमक और नींबू का रस डालकर अच्‍छे से म‍िक्‍स कर लें।
6. इसमें एक चम्‍मच सरसों का तेल म‍िलाएं।
7. बैंगन का चोखा तैयार है। इसे गरमागरम रोटी, पराठा या चावल के साथ परोसें।


 


साउथ इंडियन तरीकों से बैंगन | Bagan South Indian Reciepes

साउथ इंडियन पारंपरिक व्यंजन मसालों और अनोखे टेस्ट का अनोखा अनुभव प्रदान करते हैं। जिनका स्वाद और महक दूर से ही खाने की तरफ़ आकर्षित करती हैं।इनमें डोसा, इडली, सांभर, रसम, उत्तपम और विभिन्न प्रकार के चावल व्यंजन जैसे कि बिसी बेले भात, वांगी भात प्रमुख हैं। 

ऐसे ही यहां बैंगन से बने कुछ लोकप्रिय डिशेस भी हैं जो कुछ मसालों के साथ बनाए जाते हैं, जिनका टेस्ट लाजवाब होता है। तो आइए जानते हैं ऐसी ही बैंगन से बनी कुछ डिशेस के बारे में।

वांगी भात रेसिपी: 

सामग्री:

बैंगन – 4-5 चौकोर कटा हुआ
पका हुआ चावल – 2 कप
तिल – 2 चम्मच
धनिया के बीज – 2 चम्मच
सूखी लाल मिर्च – 3-4
सरसों के बीज – 1 चम्मच
हल्दी – 1/2 चम्मच
हिंग – 1 चुटकी
करी पत्ते – 6-8
मूंगफली – आधा कप
काजू- 8-10
इमली का पानी – दो छोटा चम्मच
तेल, नमक स्वादानुसार

वांगी भात रेसिपी बनाने की विधि:

तिल, धनिया, और लाल मिर्च को भूनकर पाउडर बना लें।अब कढ़ाई में तेल गरम करें, राई मूंगफली, हिंग और करी पत्ते का तड़का लगाएं, और फिर मुंगफली डालकर भूनें। अब कटे हुए बैंगन डालें, हल्दी और नमक मिलाकर नरम होने तक पकाएं।पिसा हुआ मसाला और इमली के पानी को डालें और अच्छी तरह मिलाएं।

गुट्टी वंकाया करी रेसिपी:

सामग्री:

छोटे बैंगन - 8-10
मूंगफली - 3 चम्मच
तिल -1 चम्मच
सूखी नारियल - 2 चम्मच
धनिया के बीज - 1 चम्मच
जीरा - 1 चम्मच
अदरक - आधा इंच
लहसुन - 4-5 कलियां
इमली का पेस्ट - 2 चम्मच
तेल, नमक, हल्दी, मिर्च पाउडर- स्वादानुसार

गुट्टी वंकाया करी रेसिपी बनाने की विधि:

मूंगफली, तिल, नारियल, धनिया, जीरा, और लहसुन को भूनकर पेस्ट बना लें। अब बैंगन को क्रॉस-क्रॉस कट करें और इसमें मसाला भरें।कढ़ाई में तेल गरम करें, मसाला भरे बैंगन डालें और धीमी आँच पर पकाएँ। अब इसमें इमली का गूदा और थोड़ा पानी मिलाकर 15-20 मिनट तक पकाएं। अब इसे गर्मागर्म रोटी या चावल के साथ परोसें।

एन्नाई कथिटिक्काई कुझांबु रेसिपी:

सामग्री:

छोटे बैंगन - 6-8
इमली का पेस्ट या चटनी - 2 चम्मच
चना दाल - 1 चम्मच
भुनी हुई मूंगफली - 1/4कप
तिल - 1चम्मच
टमाटर की प्यूरी - 1/2कप
धनिया पाउडर – 1 चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - 1/2चम्मच
सरसों के बीज - 1 चम्मच
मेथी - 1/2 चम्मच
हिंग - 1 चुटकी
करी पत्ते - 6-8
तेल, नमक स्वादानुसार

विधि:

1. सबसे पहले तिल के तेल में बैंगन को सुनहरा भून लें। 

2. अब सरसों, मेथी दाना,करी पत्ते, लाल मिर्च पाउडर और प्याज का तड़का लगाएं और सुनहरा होने तक भूनें। 

3. अब टमाटर प्यूरी के साथ धानिया पाउडर, नमक, इमली की चटनी और हींग डालें। 

4. अब इसमें चना दाल, भूनी हुई मूंगफली, तिल को भूनकर मसाला तैयार करें। 

5. अब इस मसाले में भुना हुआ बैगन डालें कुछ देर पकाएं और गर्म ही सर्व करें।

 

 

 

Garlic Chutney For Cholesterol

 कोलेस्ट्रॉल एक तरह का फैट है, जो शरीर के लिए जरूरी होता है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। आजकल की खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खान-पान के कारण कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ना एक आम समस्या बन गई है।

ऐसे में प्राकृतिक उपचार (Natural Heart Care Tips) के रूप में लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। लहसुन न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि यह सेहत के लिए भी कई तरह से लाभदायक है। आइए जानते हैं कि लहसुन कोलेस्ट्रॉल कम करने में कैसे मददगार है और कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए इसकी चटनी कैसे बनाएं (How To Make Garlic Chutney) ।

लहसुन कोलेस्ट्रॉल कम करने में कैसे मदद करता है?


एंटीऑक्सीडेंट गुण- लहसुन में एलिसिन नाम का कंपाउंड पाया जाता है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के लेवल को बढ़ाता है।


ब्लड सर्कुलेशन में सुधार- लहसुन ब्लड वेसल्स को फैलाकर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। इससे आर्टरीज में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होता है और दिल स्वस्थ रहता है।


सूजन कम करना- लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो धमनियों की सूजन को कम करते हैं और कोलेस्ट्रॉल के जमाव को रोकते हैं।


लीवर फंक्शन को बेहतर बनाना- लहसुन लीवर के फंक्शन को सुधारता है, जो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है।

लहसुन की चटनी बनाने की विधि:

लहसुन की चटनी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसे बनाने की विधि बहुत ही आसान है और इसे आप अपने डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं लहसुन की चटनी बनाने की आसान विधि-

सामग्री:

लहसुन की कलियां: 10-12
हरा धनिया: 1/2 कप (कटा हुआ)
हरी मिर्च: 2-3 (स्वादानुसार)
नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच
नमक: स्वादानुसार
जीरा पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच
ऑलिव ऑयल या सरसों का तेल: 1 बड़ा चम्मच


लहसुन की चटनी बनाने की विधि:

1. सबसे पहले लहसुन की कलियों को छीलकर अच्छी तरह धो लें।
2. मिक्सर जार में लहसुन, हरा धनिया, हरी मिर्च और नमक डालें।
3. इन सभी सामग्रियों को बारीक पीस लें। आप चाहें तो थोड़ा पानी मिलाकर इसे पतला बना सकते हैं।
4. अब इसमें नींबू का रस, जीरा पाउडर और तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
5. चटनी को एक बाउल में निकालें और इसे रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ परोसें।
 

कैसे लहसुन को डाइट में शामिल करें?

लहसुन की चटनी को आप अपनी डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसे सुबह नाश्ते में या दोपहर के खाने में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, ज्यादा मात्रा में लहसुन खाने से पेट में जलन या अन्य समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए।


Saturday, 1 February 2025

क्यों 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है? | National Women's Day

 भारत में हर साल 13 फरवरी को नेशनल वुमन्स डे (राष्ट्रीय महिला दिवस) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके अधिकारों और समाज में उनके योगदान को समर्पित है (National Women's Day 2025 Significance)।

इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक उपलब्धियों को सराहना और उन्हें समानता और सम्मान दिलाने के लिए जागरूकता फैलाना है। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि 13 फरवरी को ही क्यों नेशनल वुमन्स डे (National Women's Day Celebration) मनाया जाता है? 

इसका इतिहास क्या है? 

आइए जानते हैं। 

नेशनल वुमन्स डे का इतिहास

नेशनल वुमन्स डे का इतिहास भारत की एक महान महिला नेता और स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू से जुड़ा हुआ है। सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था (Sarojini Naidu Birth Anniversary) और उन्हें भारत की "नाइटिंगेल ऑफ इंडिया" (भारत कोकिला) के नाम से भी जाना जाता है।
 

वह न केवल एक कवयित्री और लेखिका थीं, बल्कि एक प्रखर वक्ता और समाज सुधारक भी थीं। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं और देश की पहली महिला राज्यपाल (उत्तर प्रदेश) भी रहीं।

उनके योगदान और संघर्ष को सम्मान देने के लिए ही उनके जन्मदिन, 13 फरवरी को, भारत में नेशनल वुमन्स डे के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने का संदेश देता है।

नेशनल वुमन्स डे का महत्व

नेशनल वुमन्स डे का उद्देश्य केवल महिलाओं की उपलब्धियों को सराहना ही नहीं है, बल्कि यह दिन समाज में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और असमानताओं को भी उजागर करता है। भारत में आज भी महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस दिन को मनाने के पीछे यह संदेश छिपा है कि महिलाओं को समान अवसर मिलने चाहिए और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
नेशनल वुमन्स डे पर देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठन इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं और महिलाओं के योगदान को सलाम करते हैं।
 

Monday, 15 May 2017

गोपालबाद की यादें

मेरा बचपन गोपालबाद मे गुजरा था इस लिए मेरे जेहन में गोपालबाद कई बहुत ही खूबसूरत यादे हैं। हालांकि बाद में बिहार शरीफ चला गया आगे की पढ़ाई के लिए इसी लिए बाद कि यादें उन्ही छुट्टियों की है। एक बात और मेरे पिता जी सरकारी नौकरी करते थे वो भी साउथ बिहार(अब झारखंड) के हजारीबाग जिला के गौरिया करमा फार्म में। इसलिए बचपन गोपालबाद के अलावा गौरिया करमा और नानी घर(बिंद के पास रसलपुर) में बीता था। इस लिए इन सभी जगहों की खुबसूरत यादें हैं। एक बात और सभी जगह जहां भी जाता था वहां स्कूल जरूर जाना होता था क्योंकि हर जगह सरकारी स्कूल में मेरा नाम लिखवाया हुआ था।
हर जगह की यादें अपने आप मे अनूठा और जुदा जुदा है। पर गोपालबाद की यादें की कोई तुलना नही है।

बचपन की जो यादें ताज़ा है उनमे से एक है 1981 में मेरी चचेरी दीदी की शादी की यादें। पहली जब शादी हुई थी तो उस समय बाढ़ आई हुई थी और बारात धनुषबिगहा गाँव से नाव पर आई थी। उस समय मेरी उम्र मुश्किल से 5 होगी। गोपालबाद से लोग पेट्रोमैक्स लेकर पैइन नदी के पास गए थे नाव को रास्ता दिखाने को। और आज भी ये दृश्य मेरे जेहन में कैद है लेकिन बहुत ही धूमिल है।