Saturday, 1 February 2025

क्यों 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है? | National Women's Day

 भारत में हर साल 13 फरवरी को नेशनल वुमन्स डे (राष्ट्रीय महिला दिवस) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके अधिकारों और समाज में उनके योगदान को समर्पित है (National Women's Day 2025 Significance)।

इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक उपलब्धियों को सराहना और उन्हें समानता और सम्मान दिलाने के लिए जागरूकता फैलाना है। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि 13 फरवरी को ही क्यों नेशनल वुमन्स डे (National Women's Day Celebration) मनाया जाता है? 

इसका इतिहास क्या है? 

आइए जानते हैं। 

नेशनल वुमन्स डे का इतिहास

नेशनल वुमन्स डे का इतिहास भारत की एक महान महिला नेता और स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू से जुड़ा हुआ है। सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था (Sarojini Naidu Birth Anniversary) और उन्हें भारत की "नाइटिंगेल ऑफ इंडिया" (भारत कोकिला) के नाम से भी जाना जाता है।
 

वह न केवल एक कवयित्री और लेखिका थीं, बल्कि एक प्रखर वक्ता और समाज सुधारक भी थीं। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं और देश की पहली महिला राज्यपाल (उत्तर प्रदेश) भी रहीं।

उनके योगदान और संघर्ष को सम्मान देने के लिए ही उनके जन्मदिन, 13 फरवरी को, भारत में नेशनल वुमन्स डे के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने का संदेश देता है।

नेशनल वुमन्स डे का महत्व

नेशनल वुमन्स डे का उद्देश्य केवल महिलाओं की उपलब्धियों को सराहना ही नहीं है, बल्कि यह दिन समाज में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और असमानताओं को भी उजागर करता है। भारत में आज भी महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस दिन को मनाने के पीछे यह संदेश छिपा है कि महिलाओं को समान अवसर मिलने चाहिए और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
नेशनल वुमन्स डे पर देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठन इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं और महिलाओं के योगदान को सलाम करते हैं।
 

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